अमृतसरी प्रेम कहानी, जो हो न सकी…

निकला था मैं देश देखने, खाने पीने, और कुछ अच्छा लिखने. क्या पता था यह सफ़र मेरा दिल तोड़ देगा, ग़म भरे मोड़ पर ला कर मुझे छोड़ देगा. भरवान दा ढाबा के वोह करारे कुलचे मदमस्त चने और खिलखिलाती लस्सी. फिरनी जैसी आपने कभी न खायी, नरम पनीर की बाहों में संतुष्टी पायी. चटोरेपन का […]

Spicy Hot Summer, Served With Buffalo Dip

There are summers, and then there is that idiotic summer. I was interning with an organization studying tribal arts in the Rathwa tribe dominated Chota Udaipur region of Gujarat. In a constantly sweltering Sun, which was seldom in mood to bend itself below 45 odd degrees, we roamed across villages exploring styles of Pithora Paintings […]

Thali Memoirs and A Visit to Rajdhani

Honestly, I have slightly moved away from the Thali format (by Thali I mean the Unlimited Thali formats, representative of the scores of Marwari-Rajasthani-Gujarati style platters). My initial indulgence in Thalis was a result of petty bets on hogging more rather than any particular interest food. We took so much interest in wiping clean watis […]

थम सा गया ये देश.

दिशाहीन, उलझा सा, असमंजस से जूझता हुआ, मेरा देश ऐसा तो न था. घोटालो से चरमराया विश्वास, लोकतंत्र का बना मज़ाक. अर्थव्यवस्था की चरमरायी सी हालत, जाति-धर्म के अनसुलझे विवाद, क्या मेरा देश ऐसा ही था? पर इन सब के बीच कम से कम एक आशा थी, की कुछ बदलेगा, सामाजिक और आर्थिक विकास नहीं, […]

App आये बहार आयी.

रविवार का था वोह दिन, जब रह ना पा रहा था भोजन तकनीक के बिन. यह दिन का हसने का, मिलने जुलने का, संगणक और इन्टरनेट से बाहर निकल, हर व्यक्ति विशेष से मिलने का. Nokia का नाम देख याद आयी मुझे उस प्रसिद्द नागिन की चाल, सरलता और सुदृढ़ता के बल पर जिस Nokia […]

किस्सा कचोरी का…

रविवार का था वह एक आम सा दिन, दूरदर्शन पर चल रहा था चंद्रकांता, कैसे रहते लोग कड़क सी चाय के बिन. चाय के साथ था कुछ खस्ता, रस्क, और नमकीन, पर जब घर आई कचोरी और जलेबी, तब खिस्की ज़बान तले ज़मीन. समोसा, आलू बोंडा और मंगोड़े भी देते है टक्कर, पर कौन रह […]

Rail-pedia

As I was sitting with my friends on the Raipur station yesterday and waiting for our train (7 hours late) to arrive I saw a passenger train coming before our much delayed “super-fast” train. I said to my friends how come this happened and an Uncleji came from nowhere, “Yeh special passenger hai, Navratri hai […]

टेस्ट क्रिकेट का अंत… या शुरुआत?

आने वाला है क्रिकेट इतिहास का एक अमर क्षण जब होने चलते स्वयं के टेस्ट के पूरे दो हज़ार रन, १८७७ मैं शुरू हुई थी जो प्रथा २०११ मैं क्या हो गयी है इसकी व्यथा. अंग्रेजो ने नीव रखी क्रिकेट के खेल की खेल खेल मैं उन्होंने फैलाई सभ्यता ब्रिटेन की, शुरू मैं था बस […]

विस्फोट, तुम फिर आ गए!

विस्फोट, तुम फिर आ गए! जीवन की कीमत तो तुमने समझी नहीं कम से कम भय की परिभाषा तो समझ लेते. मुंबई शहर में लोग हर क्षण है मरते ज़िन्दगी की भागदौड़ में दबते कुचलते इस भाग दौड़ थकान के बीच किसे है समय भयभीत होने का. भय है बढती महंगाई का, नौकरी का, भय […]

काश ये दिल होता Tupperware का

हम प्यार करते थे उनसे बेशुमार, उनके इश्क मैं हुए थे बीमार हमे लगा वो भी है उतनी ही बेक़रार, कर बैठे प्यार का इज़हार. फिर क्या कहे क्या हुआ अच्छे खासे दिल का मालपुआ हुआ, दिल तो हमारा था कोमल और नाज़ुक पर जब टूटा तो आवाज़ आई जैसे चले कोई चाबुक, कांच की […]