हैदराबादी प्रेम कहानी… जो हो ना सकी

महिना था फरवरी का, समय था वोह अफरा तफरी का Placement का चल रहा था त्यौहार, क्योकि आजकल वही तो रह गया है प्रबंधन शिक्षा का सार. मैं बैठा था interview कक्ष मैं, सवालों से जूझता कभी हँसता, कभी लडखडाता अचानक मुझसे पुछा गया, आप लगते है कहानीकार हम देखना चाहते है आपके विचार. मैंने […]

टमाटर की व्यथा: Ketchup बनू या कटरीना का Body Wash

गुमसुम गुमसुम… लाल लाल, नरम नरम, इस टमाटर मैं है बड़ा दम. जब टमाटर ketchup बन जाता, हर टेबल की यह शोभा बढाता. पकोड़े हो या पिज़्ज़ा, समोसा हो या आमलेट, टमाटर है कुदरत की एक भेंट. पर जब इंसान को हक है अपना जीवन जीने का, तो क्या टमाटर को हक नहीं अपनी राह […]

गीत नया गाता हूँ

बचपन से ही मेरी राजनीति मैं काफी रूचि रही है। ९० के दशक मैं भारतीय राजनीति मैं खासे उलटफेर हुए, परन्तु उनमे से सबसे रोचक क्षण तब आया जब अटलजी ने प्रधानमंत्री का पद संभाला। बचपन में मैंने एक दिन पुस्तकालय से एक किताब उठायी, अटलजी की जीवनी जो रोचक भी थी, और काफी कुछ […]

भेडचाल

बदलाव हमारे अन्दर होता है। बदलाव निरंतर है और उससे रोकने का शायद ही को कोई उपाय होगा। पर क्या मैं बदलना चाहूँगा? कुछ वर्षो पहले तक मुझे कुछ पता नही था की मैं जीवन मैं क्या करना चाहता हूँ, और आज भी मेरे विचार कुछ स्पष्ट नही हुए है। काम करना क्या केवल एक […]

खेल,इन्टरनेट और हम

कुछ बाराह साल का था मैं, जब मैंने पहली बार भगवान् को देखा, वो नीले रंग का मुकुट पहेनता था अपने घुंघराले बालो के ऊपर, और एक भारी लकड़ी की गदा थी उसके पास, और अपने चमत्कार से वोह दुनिया के सबसे महान गेंदबाजों का नाश कर रहा था. उस साल था विश्व कप के […]

कॉमिक्स और हमारा बचपन

लुईस कैरोल की एलिस को कल्पना के उस अद्भुत संसार में जाने के लिए खरगोश महाशय के घर का रास्ता नापना होता था लेकिन मुझे (याने जब में बच्चा था) या मेरे जैसे कई भारतीय बच्चो को अपने घर के कुछ आधे किलो मीटर की परिधि में कोई सोनू या मनोज लाइब्रेरी ढूंढनी होती थी […]